पेड़ ( कविता)

जीवन भर हरियाते
पेड़ सभी को भाते।
 दवा, फूल, फल, छाया 
देती इनकी काया।

ये चिड़ियों के घर हैं
चह-चह-चह-चह स्वर हैं।
प्राणवायु के दानी
इनसे बरसे पानी।

पर्यावरण बनाएं
हवा चले तो गाएं।
घटे न इनकी गिनती
धरती करती विनती।
                                                 ⋗ कविता
                                                -  राजा चौरसिया

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